इमरजेंसी: जब लोकतंत्र घायल हो गया था (When democracy was wounded)

1975 की इमरजेंसी के वे पत्रकार बखूबी याद कर सकते हैं जिन्‍होंने उस समय पत्रकारिता में प्रवेश किया था या जो मंजे हुए पत्रकार हो गये थे। शासक हमेशा से यही नज़रिया रखता है कि प्रेस को उसकी खिलाफत करने का अधिकार नहीं है, लेकिन इसकी जड़ें कहीं न कहीं ईस्ट इंडिया कंपनी के कोलकाता […]